कालिक बाजार केन्द्रों की स्थानिक-कालिक संगठन


डुमन साहू और कृष्णनन्दन प्रसाद
भूगोल विभाग, शा. दिग्विजय स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनंदगांव (छ. ग.)

भारत के लगभग सभी प्रदेशों में कालिक बाजार का अस्तित्व है. इसके कारण शहर तो शहर दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थानीय जनसँख्या की जरूरतों को कालिक बाजार के माध्यम से पूरा किया जाता है. इसी को ध्यान में रखकर छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के कालिक बाजार केन्द्रों की स्थानिक सामायिक संगठन को अध्ययन के लिए चुना गया है. यह अध्ययन द्वितीयक एवं प्राथमिक दोनों तरह के आंकड़ों पर आधारित है. नगर पालिक निगम से 2015-16 में कालिक बाजारों की संख्या, इनके लगने वाले स्थानों की जानकारी, बाजार लगने वाले दिन और उनकी बारंबारता तथा संरचित अनुसूची के माध्यम से आंकड़ों का संग्रहण किया गया है. आंकड़ों के विश्लेषण में निकटतम पडोसी विधि, काई परिक्षण, विधि, मानचित्र विधि का उपयोग किया गया है. 


अध्ययन निम्नांकित तथ्यों को उजागर करता है दृ एक. कालिक बाजार केन्द्रों का वितरण यादृश्चिक प्रतिरूप ¼Random Pattern½ का है, दो. कालिक बाजार के दो रूपों (साप्ताहिक और अर्ध्सप्ताहिक) का अनुपात 2:1 (69.23 और 30.7 प्रतिशत) है. तीन कालिक बाजार केन्द्रों पर जनसँख्या घनत्व उच्चतम से न्यूनतम कुल पांच वर्गों में पाया गया.


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How to cite this article:
Sahu D and Prasad KN (2022) कालिक बाजार केन्द्रों की स्थानिक-कालिक संगठनण् Research Fronts, XI: 25-45.